Monday, August 1, 2011

तुझे पा लिया

तुमको कभी ऐसे पाऊँगा,
तुझमे ही मै खो जाऊँगा,
मर जाऊँगा,मिट जाऊँगा,
पर अब जुदा हो ना पाऊँगा।
मन के घनघोर बादलों पे,
जैसे छायी हो रात की कालिमा,
वैसे ही मै तुझमे समा के,
खुद को करुँगा लालिमा।

मेरी आत्मा,परमात्मा से,
मिल के जो सुख पायेगी,
मै कैसे कहूँ,क्या नाम दूँ,
शब्दों में कैसे व्यक्त करुँ?

उस मधुर मिलन की कामना।

जो बीत गया उसे भूल कर,
अंदर की आँख को खोल कर,
मन के दीपक की ज्योत जला,
तेरे चरणों में मन को लगा।

चाहूँगा मै तुझे ऐसे प्रभु,
जैसे मौत की शय्या पे पड़ा,
कोई चाहता हो जीने की लालसा।

चाहत मेरी ऐसे पूर्ण हो,
मधुबन में जैसे कोई जीर्ण हो,
हो लालसा मद्भाल की,
हो कामना बस प्यार की,
मधुशाला में भी जो रहे,
बन के प्याले की मद्लालसा।

अब तू रहेगा,मै रहूँगा,
और बस चाहत रहेगी,
तेरे साथ मै,मेरे पास तू,
बन के ख्वाहिश बस साथ चलेगी।

तू नैनों में बस जायेगा,
हर जगह तू ही नजर आयेगा,
हिन्दू भी तू,मुसलिम भी तू,
इसा भी तू कहलायेगा।

राजा भी तू,प्रजा भी तू,
शासित भी तू,शासक भी तू,
सुख दुख का सारा खेल तू,
सब भेदभाव मिट जायेगा।
मन स्वच्छंद उड़ता हुआ,
तब अपनी मँजील पायेगा।

सब को भूला,तू जो मिला,
बस तुझमे ही अब नेह लगा,
सब कष्ट मेरे अब मिट रहे,
जैसे पा लिया हो अमृत की थाल सा।

तू साथ है,अब क्या प्यास है,
तू पास है,ये मेरी साँस है,
अब मै रहूँ तुझमे कहूँ,
तुझे पा लिया,तुझे पा लिया,
तुझको तो अब मै पा लिया। 

18 comments:

vidhya said...

वाह बहुत ही सुन्दर
रचा है आप ने
क्या कहने ||
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kshama said...

Jo beet gaya use bhoolna kitna zarooree hai!
Behad sundar rachana!

संजय भास्कर said...

गहन भावों के साथ बहुत ही हृदयस्पर्शी रचना है !

संजय भास्कर said...

bahut khoob satyam bhai ..........mai to fan ho gaya apka

संध्या शर्मा said...

बहुत सुन्दर रचना रची है आपने... आत्मा से परमात्मा के मधुर मिलन की सुन्दर कामना...

रश्मि प्रभा... said...
This comment has been removed by the author.
रश्मि प्रभा... said...

मेरी आत्मा,परमात्मा से,मिल के जो सुख पायेगी,मै कैसे कहूँ,क्या नाम दूँ,शब्दों में कैसे व्यक्त करुँ?.... is avyakt bhawnaaon ko bas samjha ja sakta hai

Anita said...

आध्यात्मिक ऊँचाइयों को छूती हुई बहुत सुंदर रचना !

रेखा said...

बहुत ही सुन्दर और गहरी अभिव्यक्ति ....

prerna argal said...

बहुत सुंदर शब्दों में लिखी शानदार रचना /आत्मा को परमात्मा से मिलाने की आध्यात्म से परिपूर्ण बेहतरीन कविता /बहुत -बहुत बधाई आपको /

प्रवीण पाण्डेय said...

भावों का तन्मय प्रवाह।

Maheshwari kaneri said...

हृदयस्पर्शी रचना ..सुन्दर...

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

अरे भाई कल शादी की बात कर रहे थे और आज पा भी लिए...बहुत-बहुत बधाई...बहुत सुन्दर तरीके से अभिव्यक्त किया अपने कोमल भावों को...अतिसुन्दर

sushma 'आहुति' said...

आध्यात्मिक भावो को बहुत ही खुबसूरत तरीके से प्रस्तुत किया है आपने....

Dr Varsha Singh said...

अत्यंत हृदयस्पर्शी...

Suresh Kumar said...

Mubarak ho Satyam ji...bahut acchi rachana...aabhar

Ojaswi Kaushal said...

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shalini said...

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